ये किस माहौल में हम है
ख़ुशी के भेष में गम है
देसी की बोतल में रम है
गले में सबके बलगम है
कनिका के बिगड़े सरगम है
कोरोना के चक्कर में मानव बन बैठा जिंदा बम है
MP में राजनीति गरमा गरम है
वॉट्सएप पर अफवाएं हरदम है
सुन लो जनता कर्फ्यू है तो निकालना कम है
क्युकी तुम्हारे लिए तो सिर्फ तुम हो
लेकिन घर वालो के लिए तो सिर्फ हम




