।। तख्त -ए -सरदार तो रोज़ बदलते है,
तख्त ए ताज को बदल कर दिखाओ,
बहुत देखे है हमने हवाओं को मोड़ने वाले
कोई समंदर- ए -लहर को बदल कर दिखाओ ।।
तख्त ए ताज को बदल कर दिखाओ,
बहुत देखे है हमने हवाओं को मोड़ने वाले
कोई समंदर- ए -लहर को बदल कर दिखाओ ।।
नमस्कार दोस्तो जो भी मैं लिखता हूं ,वो मेरे वास्तविक जीवन से संबधित होता है। किसी भी व्यक्ति विशेष को लेकर यह नहीं लिखा जाता है। अगर कभी कोई गलती होती है तो इसके लिए मैं पहले ही क्षमा प्रार्थी हूँ l
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